Saturday, June 17, 2017

बिना शर्तों का प्रेम

कहते हैं प्रेम की कोई भाषा नहीं होती और ना ही प्रेम उंच-नीच, जाति-धर्म , घर-परिवार, रंग-रूप देखता| प्रेम अन्धा होता है और यह अंधापन वाला प्यार उस खुली आँखों वाले प्रेम से कहीं बेहतर है जहाँ लोग प्रेम लगन से  नहीं शर्तों पर करते हैं|
वेश्या शब्द अपने समाज में कलंक की तरह है परन्तु देखा जाये तो हर व्यापार करने वाला आदमी- औरत वेश्य और वेश्या ही तो हैं- मतलब कि व्यापारी| चाहे फिर वो व्यापार किसी वस्तु, स्थान या देह का ही क्यों न हो| दिल और आँखों में पानी देने वाली इस कहानी को मैंने इन्टरनेट पर पढ़ा और उसे खोजा जिसने ये कृत्य हम सब तक पहुचाया| जीबीएम् आकाश नाम के किसी शख्स ने इन दोनों खूबसूरत प्राणियों को खोजा  और उसकी इस प्रेम से भी परे, अथाह प्रेम की कहानी को हम तक पहुचाया|
यह कहानी भी एक वेश्या यानि व्यापारी की है,चाहे मज़बूरी में ही सही परन्तु वो अपनी बेटी को पालने के लिए अपने धंधे में साथ बहुत ही ईमानदारी से काम करती रही और एक दिन कुछ ऐसा हुआ जो इंसानियत वो करती थी उससे भी बड़ी मिसाल बन गया|



बांग्लादेश की रहने वाली रजिया पेशे से व्यापारी थी| एक दिन सुबह की पहली बेला, घनघोर बारिश हो रही थी, रजिया पेड़ के नीचे खड़े हो कर सूरज निकलने का इंतज़ार कर रही थी| आँखों में आंसू, खुद के लिए गुस्सा और लाचारी से रजिया न जाने कितनी बार चिल्लाई और रोती रही | लगा इतनी सुबह कौन उसे सुनेगा और देखेगा| कम से कम बारिश के शोर में ही सही, अपने अन्दर के गर्द को निकल सकती है| रजिया जल्द ही अपनी बेटी के पास जाना चाहती थी| अब वो नहीं चाहती थी कि वो फिर किसी अजनवी को मिले और कुछ वक़्त उसके साथ गुजारे| उसकी बेटी, जो हर रात माँ से जाते वक़्त एक ही सवाल पूछती_ माँ आप रात में ही काम करने क्यों जाती हो| उसका जवाब रजिया के पास नहीं था परन्तु हर दिन जाते वक़्त उसकी बेटी उसे गले लगाती|

रोती रजिया को पता ही नहीं चला कि सामने दूसरी तरफ एक शख्स व्हीलचेयर पर बैठा उसे देख रहा है| उसको जब आभास हुआ जब दूसरी तरफ से जोर से खांसने की आवाज़ आई| वह शख्स उसका ध्यान पाना चाहता था|| रजिया ने बिना आंसू पोंछे बोला मेरे पास पैसे नहीं है जो मैं आपको दे सकूँ| उस शख्स ने मेरी हथेली पर ५० टाका रखे और बोला की बारिश तेज़ होने वाली है जल्दी ही घर चली जाओ और अपनी व्हीलचेयर को धक्का लगता हुआ वो शख्स मेरी आँखों से ओझल हो गया| मैं स्तब्ध थी, जैसे काटो तो खून नहीं| पहली बार मेरे पूरे जीवन में किसी ने बिना मेरा इस्तेमाल किये मुझे कुछ दिया | उस दिन मैं बहुत दिल खोल कर रोई|

उस दिन के बाद मैं उसी पेड़ के नीचे उस शख्स को तब तक खोजती रही जब तक मैंने उसे पा नहीं लिया| मुझे पता चला की उसकी पत्नी उसे छोड़ कर चली गयी क्योंकि वह अपाहिज है| बड़े साहस के बाद मैंने उसे बोला कि मैं शायद आपको दोबारा प्यार न दे पाऊं, परन्तु जीवनभर आपकी व्हीलचेयर को लेकर चलको को तैयार हूँ| वो मुस्कुराया और बोला- हर कोई प्यार के बिना व्हीलचेयर को धक्का नहीं दे सकता है|

आज हमारी शादी को चार साल हो चुके हैं| शादी वाले दिन उसने मुझे वचन दिया कि अब तुम्हे मैं कभी रोने नहीं दूंगा| कभी-कभी हमें सिर्फ एक वक़्त का खाना हीं मिलता है परन्तु हम हर दुःख- सुख में एक दुसरे के साथ है| जैसे आज हमें एक तस्तरी खाना मिला पर हमने उसे एक साथ मिलकर खाया|

उस अनजान व्यक्ति के वादे ने मुझे फिर कभी किसी अनजान पेड़ के नीचे खड़े होकर आजतक नहीं रोने दिया|

अब्बास मिया ने अपने वादे को बखूबी निभाया|


रजिया बेगम

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