Saturday, July 22, 2017

जाको राखे साईंयां मार सके न कोई|



जाको राखे साईंयां मार सके न कोई! यह कहावत सिर्फ कहने के लिए ही नहीं बनायीं| यक़ीनन लोगों के अनुभव और चमत्कारिक घटनायों ने इसे अंजाम दिया होगा तब ही लोग एक विश्वास पर पहुच पाते हैं| ऐसी ही एक कहानी आज आपको बताने जा रहे हैं जो कि एक १७ साल की बच्ची की है जो एक हवाई जहाज के क्रैश होने के बाद वो बच्ची जिंदा रह गयी|

BBC के अनुसार, जर्मन-पेरुवियन जुलिआन कोएप्क सन १९७१ में अपनी माँ के साथ हवाई जहाज में यात्रा कर रही थी| जहाज अपनी गति से अमेज़न के ऊपर से निकल रहा था, तभी कुछ ऐसा हुआ की सभी बैठे यात्रियों के होश उड़ गए क्योकि जहाज को किसी चीज़ ने जबरदस्त हिट किया| वह और कुछ नहीं आकाशीय बिजली जहाज पर आ कर गिरी थी, जिस वजह से जहाज में खराबी आ गयी और सभी यात्रियों के साथ जहाज ज़मीन पर आ गिरा|

यह हादसा जुलिआन के हाई स्कूल के एक रात बाद का है जब उनकी माँ उन्हें ले कर वापस क्रिसमस मनाने के लिए जर्मनी आ गयी थी|  जुलिआन की हाई स्कूल ख़तम होने पर फंक्शन में शामिल होने उनकी माँ गयी थी और उसके बाद उन दोनों को जर्मनी आना था जहाँ उनके पिता रहते थे|

जुलिआन २ मील की दूरी से पृथ्वी पर आ गिरी| चमत्कारिक ढंग से, वह इस कहानी को बताने वही एक उस पूरे जहाज में थी जो बच गयी, परन्तु दुर्भाग्यवश उनकी माँ और सभी यात्री इस हादसे से नहीं बाच पाए|

आश्चर्य करने वाली बात यह थी कि जहाँ उनका जहाज क्रैश हुआ था वह स्थान अत्यंत भयावक और असम्भव परिवेश था, जहाँ बिना किसी हथियार या सुविधा के १० दिन तक जीवित रहना असम्भव था| भयानक जंगल, जहरीले पेड़-पौधे. भूखे जंगली जानवर, आदि|

कोई भी साधारण व्यक्ति का ऐसे परिवेश में जिंदा रहना संभव ही नहीं था, परन्तु जुलिआन कोई आम किशोरी नहीं थी| उसने घायल होने के बावज़ूद १० दिन तक ना ही सिर्फ जिंदा रही बल्कि उस जंगले को पार करके वह लोगों तक पहुची और मौत को मात दे दी|


जुलिआन का जन्म पेरू में हुआ था| उसके पिता जर्मन होने के साथ-साथ जीव विज्ञानी थे और पेरुवियन माँ पक्षी विज्ञानी थी| इसी वजह से उसने अपनी बहुत सारा वक़्त उनके अपने माँ-बाप के साथ अमेज़न के जंगलों में गुजरा था जहाँ वह अपने शोध को अंजाम देते थे|

अनजाने में ही सही परन्तु उसने अपने माँ-बाप के साथ इस गुजारे वक़्त में बहुत कुछ सीख लिया जो उसे इस जहाज क्रैश के समय काम आया| उसके सीखा कि कैसे विपरीत परिस्थियों से कैसे लड़ा जाये और उसमे खुद को जीवित रखा जा सकता है| उसको कभी नहीं पता था कि अनजाने में सीखे हुए ये कौशल उसे ऐसे काम आयेंगे जिससे वो खुद को बचा पायेगी|
जूलियन की माँ और पिता

जुलिआन ने BBC को बताया, जहाज बादलों के ऊपर से गुजर रहा था, जहाँ भयानक तूफान के साथ-साथ आकाशीय बिजली भी थी| इस घटना की गंभीरता का पता तब चला जब आकाशीय बिजली जहाज से आ टकराई| उसके बताया कि १० मिनट बाद बायें तरफ के इंजन से आग निकलने लगी| तब मेरी माँ ने बहुत ही शांत शब्दों में बोला- 'यही अंत है, सब ख़तम हो गया'| यही उनके अंतिम शब्द थे|

अगले ही पल उसने देख जहाज नीचे की तरफ जा रहा था वह अपनी माँ से अलग हो गयी, हर तरफ चिल्लाहटें थी| थोड़ी देर बाद आवाजें शांत हो गयी, उसने देखा वह जहाज से बाहर थी, और नीचे की तरफ रफ़्तार से गिरती जा रही थी| मैं सीट के साथ पेटी से बंधी हुई थी| उस वक़्त मैं सिर्फ हवा की फुसफुसाहट सुनाई दे रही थी|

ज़मीन पर आते ही उसने अपने होश खो दिए और अगले दिन तक वह बेहोश पड़ी रही| जब उसे होश आया तो उसकी गले की हड्डी टूटी हुई थी, कुछ गहरी चोटें उसके शरीर पर थी, परन्तु उसको सब याद था कि कल पिछले दिन क्या हुआ था|

उसने उस भयावक जंगले में १० दिन गुजारे| उसने अपने एक जूते (जो उस जहाज क्रैश में बच गया था) की सहायता सेमैदान का परिक्षण करते हुए जंगले को पार किया| वह जानती थी कि वह एक असत्कारशील परिवेश में है| जहाँ वो चरों तरफ बहयांक जानवरों और जहरीले पेड़-पौधों से घिरी हुई है|

उसे एक टाफियों से भरा बैग मिला जो उस प्लेन क्रैश में किसी का रहा होगा| उसने उन टाफियों की सहायता से उसने थोड़े पोषक तत्वों को बचा कर रखा| खुख लगने पर उन्हें खाया क्योकि वह जंगल से कुछ नहीं खा सकती थी|

चोथे दिन उसने जानलेवा अनुभव किया , जब उसने अपने चरों तरफ सिर्फ लाशें ही लाशें देखी यह लाशें उन्ही लोगों की थी जो इस  जहाज क्रैश में मरे थे| उसने बताया की इतनी साडी लाशों को देख कर वह पेनिक हो गयी क्योकि उसने अपने जीवन में पहले बार मरे हुए इंसान को देखा वो भी एक साथ इतने सारे|

उसके अगले कुछ दिन भी यूँ ही भयावक अनुभव से भरे हुए थे| एक तो अकेले भयानक जंगले में, शरीर पर छोटे और खाने के लिए भी कुछ खास नहीं और सबसे खतरनाक दिशाहीन रास्ते|

आखिरकार दसवे दिन वह कुछ लोगों की आवाज़ सुनकर जागी, जो कि लड़की काटने वाले लोग थे| जब उन लोगों ने उसे पहली नजर देखा तो सब के सब डर गए क्योंकि उनको लगा वह कोई भूत है| परन्तु भाग्यवश जुलिआन को स्पेनिश बोलना आता था तो उसने सारी स्थिति उन लोगो को समझा दी और उन लोगों ने उसे खाने को दिया और उसके घावों पर मरहम पट्टी भी की|

अगले दिन वह उसे उसके गन्तव तक ले गए जहा उसके पिता को उसको सोंप दिया गया, जिससे वह उसकी देखरेख कर सकें| जुलिआन की सहायता से उसकी माँ मारिया की लाश को भी खोज लिया गया परन्तु दुर्भाग्यवश उसकी माँ को ज्यादा गहरी चोटें रही होंगी इसलिए वह बच न सकीं|

जुलिआन ने अपनी माँ की विरासत को संभाल कर रखा और आज वह जीव विज्ञानी हैं|  पढाई पूरी करने के बाद वह अपने देश जर्मनी वापस आ गयी| इस दुर्घटना के अनुभव को वो कभी नहीं भूल सकती| उनका बचना उनके लिए ही नहीं पूरे विश्व के लिए चमत्कार था|

तब ही तो किसी ने ठीक ही कहा है- जाको राखे साईंयां मार सके न कोई|

Friday, July 21, 2017

आंगन का दिया


उस दिन सारे गाँव में बिजली नहीं थी क्योकिं सुबह से बारिश बहुत तेज़ थी, शायद कोई तार हिल गया होगा या ट्रांसफार्मर में आग लग गयी होगी| हर शाम की तरह दादी ५ बजे ही खाना बनाने बैठ गयी और दादू उनको हर रोज़ की तरह सामान उठ-उठा कर मदद करने लगे| खाना बना और खा-पी कर हम सब ६ बजे तक बिस्तर में आ गए| मैं दूसरे कमरे मैं थोडा लैपटॉप पर अपना काम निपटने चली गयी| दादू ने रेडिओ ओन कर पुराने गाने लगा दिए और दोनों अपनी-अपनी खाट पर लेटे-लेटे गुनगुनाने लगे|

थोड़ी देर काम करने के बाद सोचा क्यों न इतने बड़े घर में फैले सन्नाटे की कहानी दादू से सुनी जायें और मैं भी उनकी साइड में पड़ी खाट पर आ कर लेट गयी और बारिश की गिरती बूदों को सुनने का प्रयास करने लगी| कोठरी में तमाम पुराना सामान था या कहूँ दादी को जो सामान उनके मायके से शादी के वक़्त मिला था वही- लोहे का नक्कासियों से जड़ा हुआ संदूक, पुराना रेडियो, एक टूटी सी साइकिल, जिसकी चैन नीचे तक झूल रही थी, जिससे पता चल रहा था कि वह आने काम में सफल रही है| एक बहुत ऊँचे पाए वाली खाट, जिस पर मुझे सुलाया गया था और पीतल के कुछ बर्तन|
२ दिन हो गए थे आये मुझे, इतना बड़ा घर, जिसमें सभी सुख-सुविधाएं, बड़े-बड़े ऊपर से नीचे तक कमरे बने हुए थे, उनमें डबल बेड, सोफे कुर्सी भी थे, परन्तु फिर भी न जाने क्यों  दादा- दादी इस पुरानी कोठरी में ही अपना ज्यादातर वक़्त गुजारते हैं|

थोड़ी देर मौन रहने के बाद मैंने गानों की श्रंखला में खलल डाली और पूछा सब कहाँ-कहाँ सेटल हो गए दादू..? कुछ पल थमे और फिर दोनों ने बोलना शुरू किया और बोलते गए, कभी बोलते-बोलते दोनों हसे तो कभी आँखें भर भी आयीं| यादों का सिलसिला करीबन २ घंटे बिना किसी अन्तराल के चलता रहा और अंत में बिना किसी पड़ाव पर पहुचे समझोते पर आ कर रुक गया|

मैंने दादू का परिचय नहीं कराया| मेरे ही दादू नहीं बल्कि सारा स्कूल उनको प्यार से दादू बोलता था क्योंकि वह सबसे ज्यादा अनुभवी थे पूरे स्कूल में| रिटायर्मेंट के बाद इलाहाबाद के पास अपने छोटे से बड़े गाँव मैं वापस आ गए और अपने माँ बाप की सेवा में लग गए| कुछ दिन बाद पिताजी ने समाधी ले ली परन्तु माँ आज भी जिंदा हैं और उनका ख्याल दादू बड़े प्यार से रखते हैं|

बनारस से गुजरते वक़्त मैंने सोचा क्यों ना गुरुपूर्णिमा वाले दिन दादू को सरप्राइज दिया जाये, परन्तु बिना उनकी मदद के उस गाँव में पहुचना थोडा मुश्किल था| दादू ३ घंटे पहले ही बस स्टैंड आ कर बैठ गए और आस-पास के सारे लोगों को बता दिया कि मेरी बेटी आ रही है| गाँव की खूबसूरती होती है कि मेहमान एक के घर में आये तो वो सबका मेहमान होता है| जब मैं पहुची तो बस स्टैंड पर बहुत से लोग मेरा इंतज़ार कर रहे थे| सबको अभिवादन कर उनसब के साथ दादू के घर आ गयी और हसी-मजाक, ठहाके- यादों का सिलसिला तक़रीबन सारे दिन चला| दादू ने अपनी लिखी बहुत सारी  नयी कवितायेँ सुनाई, वह बेहद खुश थे, हम मंडी गए, सब्जी खरीद, बहुत तरह के आम ख़रीदे, कई लोगों से मिले|

२ दिन बाद मुझे जयपुर के लिए निकलना था| मैं सामान पैक कर रही थी और दादू साइड में बैठ कर मुझे बार-बार धन्यवाद दे रहे थे और अगली बार आने की तिथि पूछ रहे थे| दादी ने बहुत तरह के बहुत सारे आम पैक कर दिए| मैंने गाँव के बहुत लोगों से विदाई ली और दादी को गले लगाया ही थी कि  उनकी आँखों से आंसू बह निकले और दादू ने एक रुखी मुस्कराहट के साथ कहा तुम घर को फिर से सुना कर चली| मैंने उनकी दोनों की आँखों में दर्द की एक पोटली को फिर से खुलते देखा, उस हरिया घर को सूखते झाड बनने की कसक को मैं साफ़ महसूस कर पा रही थी| सजी हुई दीवारें जो अब धूमिल होती जा रही थीं और छत से गिरती बेलें अचानक से बोलने लगी| मैंने बैग उठाया और चलती चली गयी और न जाने कहाँ तक मैं अपने आँखों में आये सैलाव को रोक नहीं पाई|

कहानी अभी बाकि है......